02 सितम्बर 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
पुराने लंबित मामलों पर विशेष फोकस, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, चेक बाउंस और मोटर दुर्घटना दावों के मामलों को प्राथमिकता
बिलासपुर, 2 सितंबर 2026। आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यभर के संबंधित न्यायिक अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में कार्यपालक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल तथा अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू भी उपस्थित रहे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने लंबित सिविल एवं आपराधिक सुलह योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक संख्या में निराकृत किया जाए। उन्होंने महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, परक्राम्य लिखत अधिनियम से जुड़े मामलों तथा मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्री-लिटिगेशन मामलों में पक्षकारों को समझाइश देकर विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने का प्रयास किया जाए। इसके लिए न्यायिक अधिकारी पक्षकारों के साथ पूर्व बैठक कर ऐसे मामलों को चिन्हित करें, जिनमें बीमा कंपनियां, वित्तीय संस्थाएं सहित अन्य संस्थाएं पक्षकार हैं। संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर अधिकाधिक मामलों में आपसी सहमति से समझौता कराया जाए।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार 12 सितंबर को उच्च न्यायालय, जिला एवं तहसील न्यायालयों के साथ-साथ पारिवारिक न्यायालय, फोरम, अधिकरण और राजस्व न्यायालयों में भी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। इसमें सिविल एवं आपराधिक सुलह योग्य मामलों सहित विभिन्न प्रकार के विवादों का आपसी सहमति से निराकरण किया जाएगा। जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान के लिए मोहल्ला लोक अदालत का भी आयोजन किया जाएगा।
अब तक 28 लाख 35 हजार 773 मामलों की पहचान की जा चुकी है। इनमें 27 लाख 83 हजार 141 प्री-लिटिगेशन मामले तथा 52 हजार 832 न्यायालयों में लंबित मामले शामिल हैं। इन मामलों में पक्षकारों के बीच सुलह एवं समझौते की संभावनाओं को तलाशते हुए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से समाधान की उम्मीद है।
