26 अगस्त 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के स्टोर मैनेजर सूरज सिंह को हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द कराने की मांग भारी पड़ गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तकनीकी खामी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति तो दी, लेकिन इसके साथ 10 हजार की लागत जमा करने का आदेश भी दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने तारबाहर थाना, बिलासपुर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और उससे जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि अंतरिम राहत की नई अर्जी सुनवाई के दिन ही दाखिल की गई, जबकि पहले दाखिल अर्जी में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की कोई मांग नहीं थी। हाईकोर्ट ने इस तकनीकी खामी को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी।
10 हजार की लागत, विशेष विद्यालय को जाएगी राशि:हाईकोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति 10 हजार की लागत जमा करने की शर्त पर दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि शासकीय विशेष विद्यालय, दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित, तिफरा, बिलासपुर को भेजी जाए।
मामले में तारबाहर थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। याचिका में एफआईआर निरस्त करने और उससे संबंधित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
यानी एफआईआर पर तत्काल राहत की उम्मीद लेकर हाईकोर्ट पहुंचे स्टोर मैनेजर को याचिका वापस लेने के साथ 10 हजार की लागत भी भुगतनी पड़ी।
