21 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरने) से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया है। इस सफलता के बाद अब फेफड़ों और वक्ष से जुड़ी कई जटिल बीमारियों का इलाज बिलासपुर के सिम्स में ही संभव होगा और मरीजों को बड़े शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
मरीज पिछले करीब तीन माह से लगातार बुखार से परेशान था। निजी अस्पतालों में उपचार और टाइफाइड की दवाइयों के बावजूद उसकी हालत में स्थायी सुधार नहीं हुआ। जांच में दाहिने फेफड़े के आसपास अधिक मात्रा में पानी भरा मिला। सिम्स के टीबी विभाग में भर्ती कर विस्तृत जांच की गई, जिसमें टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन की पुष्टि हुई। एंटी-टीबी उपचार शुरू किया गया, लेकिन बार-बार प्लूरल टैपिंग के बाद भी पानी दोबारा भरने लगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज को जनरल सर्जरी विभाग में रेफर किया गया। इसके बाद जनरल सर्जरी, टीबी एवं एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों के आसपास जमा द्रव को सफलतापूर्वक निकाला गया तथा आवश्यक डिकॉर्टिकेशन और बायोप्सी की गई। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज अब स्वस्थ होकर नियमित फॉलो-अप पर है।
इस जटिल ऑपरेशन को जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद और डॉ. सुशील पात्रे ने अंजाम दिया। इसमें जूनियर रेजिडेंट डॉ. ऋतेश, डॉ. गरिमा शर्मा, टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉ. अनिल डरसेना एवं उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम ने सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑपरेशन थिएटर स्टाफ अश्विनी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि संस्थान में VATS मशीन उपलब्ध होने के बाद अब हर माह आने वाले 10 से 12 ऐसे मरीजों को रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि निजी अस्पतालों में इस सर्जरी पर एक से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि सिम्स में यह सुविधा शासकीय शुल्क तथा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र मरीजों को उपलब्ध कराई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस फूलना या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और आधुनिक तकनीक से ऐसे जटिल रोगों का भी सुरक्षित एवं सफल उपचार संभव है।
