18 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के चिकित्सकों ने त्वरित निर्णय, विशेषज्ञ उपचार और बेहतर समन्वय का परिचय देते हुए चाकू के गंभीर हमले में घायल 15 वर्षीय किशोर की जान बचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। समय पर की गई आपातकालीन शल्य चिकित्सा और लगातार गहन चिकित्सा देखभाल के कारण किशोर अब पूरी तरह खतरे से बाहर है।
जानकारी के अनुसार, सिरगिट्टी निवासी 15 वर्षीय किशोर पर 11 जुलाई की शाम करीब 8:30 बजे चाकू से हमला किया गया था। गंभीर हालत में उसे रात लगभग 9 बजे सिम्स के आपातकालीन विभाग लाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के निर्देश पर चिकित्सकों की टीम तत्काल सक्रिय हो गई और बिना समय गंवाए उपचार शुरू किया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि चाकू का वार पेट और छाती के महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच गया था। पेट की दीवार फटने से छोटी आंतें बाहर निकल आई थीं, जबकि छाती में गहरी चोट लगने से फेफड़ों पर दबाव बढ़ गया था और मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। छोटी आंत में कई स्थानों पर छेद होने से संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और जानलेवा जटिलताओं का खतरा उत्पन्न हो गया था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश पटेल के नेतृत्व में तत्काल आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। शल्य चिकित्सा टीम में डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शुभा एक्का, डॉ. रवि राजवाड़े तथा पीजी रेजिडेंट डॉ. कुणाल शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर में ओटी सिस्टर अंजिता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
करीब कई घंटे चली जटिल शल्य चिकित्सा के दौरान छोटी आंत के सभी छेदों की सफल मरम्मत की गई, पेट में जमा रक्त निकालकर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया और मरीज की जान बचाई गई। इसके बाद उसे एनेस्थीसिया विभाग की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया, जहां विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने 24 घंटे निगरानी रखते हुए वेंटिलेटर सपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण और दर्द प्रबंधन किया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर मरीज को सर्जरी वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि चाकू लगने जैसे गंभीर ट्रॉमा मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिलना जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। सिम्स के इमरजेंसी, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों के समन्वित प्रयासों तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण एक और गंभीर मरीज को नया जीवन मिल सका।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने पूरी चिकित्सा टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान की आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिम्स भविष्य में भी मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
