13 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। सेंट्रल जेल में हुई चर्चित हत्या की घटना के बाद अब बिलासपुर के बाल संप्रेषण गृह में हुई एक और सनसनीखेज वारदात ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। नूतन चौक स्थित बाल संप्रेषण गृह में देर रात ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा प्रहरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना के बाद चार नाबालिग बंदी संस्थान से फरार हो गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मृतक की पहचान नरेंद्र कुमार खाण्डे (42 वर्ष), पिता फेंकूलाल खाण्डे, के रूप में हुई है, जो बाल संप्रेषण गृह में सहायक सह रात्रि चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

परिजनों ने इसे सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नरेंद्र कुमार खाण्डे के हाथ-पैर बांध दिए गए थे, उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, गला दबाया गया और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, घटना को अंजाम देने के बाद चार नाबालिग बंदी बाल संप्रेषण गृह से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि इनमें तीन रायगढ़ और एक कोरबा जिले का रहने वाला है तथा सभी गंभीर अपराधों के मामलों में यहां निरुद्ध थे। पुलिस फरार बंदियों की तलाश में व्यापक स्तर पर सर्च अभियान चला रही है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह सहित प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। जांच एजेंसियां हत्या और फरारी के पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से पड़ताल कर रही हैं।
मृतक के परिजनों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नरेंद्र कुमार खाण्डे लंबे समय से तबादले की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते तबादला कर दिया जाता, तो शायद यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एक ही संस्थान में हत्या और चार नाबालिग बंदियों के फरार होने की घटना ने बाल संप्रेषण गृह की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
