28 जून 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में कानून का राज है या रसूख का? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि होटल हेवन पार्क में संचालित LIT (Life In Trance) क्लब पर लगातार लग रहे गंभीर आरोपों, मीडिया में प्रकाशित खबरों और प्रशासनिक शिकायतों के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी जारी है। शनिवार रात भी क्लब में देर रात तक तेज संगीत, भारी भीड़ और कथित तौर पर निर्धारित समय सीमा से आगे तक गतिविधियां चलती रहीं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजी साबित होती नजर आ रही है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी गईं। शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई का भरोसा भी मिला, लेकिन हकीकत यह है कि क्लब का संचालन पहले की तरह बेखौफ जारी है। शनिवार रात भी कथित तौर पर रात 1 बजे तक क्लब में महफिल सजी रही, जबकि आसपास रहने वाले लोगों को तेज संगीत और देर रात तक होने वाली गतिविधियों का खामियाजा भुगतना पड़ा।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब शहर के अन्य होटल, बार और प्रतिष्ठानों पर समय सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाता है, तब LIT क्लब को आखिर किस आधार पर कथित छूट मिल रही है? क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर प्रभावशाली संरक्षण के कारण नियम केवल आम लोगों के लिए ही लागू हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्लब में क्षमता से अधिक भीड़ जुटने की स्थिति लगातार बन रही है। यदि किसी दिन भगदड़ या आग जैसी दुर्घटना हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रिहायशी क्षेत्र में देर रात तक होने वाला शोर अब लोगों की परेशानी का कारण बन चुका है।
बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची थी, लेकिन उसके बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं आया। इससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद नियमों का पालन नहीं कराया जा सकता, तो फिर कानून का डर आखिर किसके लिए है?

अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि क्लब और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई जाए। यदि निर्धारित समय के बाद संचालन, क्षमता से अधिक भीड़ अथवा अन्य नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार प्रशासन केवल आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल देगा, या फिर न्यायधानी में कानून का समान रूप से पालन कराते हुए प्रभावशाली लोगों पर भी वही कार्रवाई करेगा, जो आम नागरिकों पर की जाती है।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
