27 जून 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित “नाद मंजरी” तृतीय सत्र प्रदर्शन एवं दृश्य कला महोत्सव एवं प्रतियोगिता में बिलासपुर के प्रतिभाशाली कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। 26 से 29 जून तक बी.टी.सी. कृषि महाविद्यालय सभागार में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से आए प्रतिभागियों ने नृत्य, संगीत, वाद्य वादन, चित्रकला एवं रेखाचित्र सहित विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता की कनिष्ठ एकल तबला वादन श्रेणी में मात्र 10 वर्षीय मिहिर जग्यासी ने अपने सटीक ताल, उत्कृष्ट लय, आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति और अद्भुत तबला वादन से निर्णायक मंडल एवं दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं वरिष्ठ एकल गायन ओपन श्रेणी में अदिति नीरज जग्यासी ने अपनी मधुर, भावपूर्ण एवं सुरमयी प्रस्तुति से सभी को प्रभावित करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

मिहिर जग्यासी, भारतीय सिंधु सभा छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रदेश महामंत्री एवं विश्व हिन्दू परिषद बिलासपुर जिला के सेवा प्रमुख नीरज जग्यासी के सुपुत्र हैं, जबकि अदिति जग्यासी उनकी धर्मपत्नी हैं।
सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में मिहिर ने जिस परिपक्वता, अनुशासन और साधना का परिचय दिया, वह प्रतियोगिता का आकर्षण बन गया। उनकी दमदार प्रस्तुति के बाद पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। संगीत के प्रति उनकी गहरी समझ, ताल पर मजबूत पकड़ और मंच पर सहज प्रस्तुति ने निर्णायकों को भी प्रभावित किया।

मिहिर की इस उपलब्धि के पीछे पिछले तीन वर्षों का नियमित अभ्यास, कठिन परिश्रम, योग्य गुरुजनों का मार्गदर्शन और परिवार का निरंतर सहयोग रहा है। बचपन से ही संगीत और ताल के प्रति उनकी विशेष रुचि को पहचानते हुए उनके पिता नीरज जग्यासी ने उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाया, जिसका परिणाम आज राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान के रूप में सामने आया।
अपनी सफलता का श्रेय मिहिर अपने गुरुजनों, माता-पिता और परिवार के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन को देते हैं। उनका सपना तबला वादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करना है।

कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों, संगीत साधकों एवं दर्शकों ने मिहिर और अदिति की उपलब्धियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। सभी ने कहा कि यदि बच्चों को सही दिशा, योग्य गुरु और परिवार का सहयोग मिले तो वे कम उम्र में भी बड़ी से बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
मिहिर और अदिति की यह सफलता केवल जग्यासी परिवार की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धि भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।
