16 जून 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। लगभग एक वर्ष से लगातार बुखार, कमजोरी और रात में अत्यधिक पसीना आने जैसी गंभीर समस्याओं से परेशान 24 वर्षीय युवती को आखिरकार सिम्स अस्पताल में नया जीवन मिला। कई निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल में उपचार के बावजूद बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था, लेकिन सिम्स के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा की गई उन्नत ब्रांकोस्कोपी जांच ने बीमारी की असली वजह का खुलासा कर दिया।
गोंडपारा निवासी 24 वर्षीय युवती 12 जून 2026 को सिम्स अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पहुंची। मरीज की जांच विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. प्रतीक कुमार के मार्गदर्शन में सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार डनसेना द्वारा की गई। इस दौरान डॉ. आकांक्षा गुप्ता, वरिष्ठ रेजिडेंट एवं उनकी टीम भी मौजूद रही।
मरीज ने चिकित्सकों को बताया कि वह पिछले लगभग एक वर्ष से बार-बार बुखार आने, कमजोरी महसूस होने तथा रात में अत्यधिक पसीना आने जैसी समस्याओं से पीड़ित थी। विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराने के बाद भी उसकी स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा था।
विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा एक्स-रे और सीटी स्कैन जांच कराई गई, जिसमें फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई दिए। बीमारी की वास्तविक वजह जानने के लिए बलगम की जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद चिकित्सकों ने आधुनिक ब्रांकोस्कोपी जांच कराने का निर्णय लिया।
ब्रांकोस्कोपी के माध्यम से फेफड़ों के प्रभावित हिस्सों की सूक्ष्म जांच की गई तथा वहां से नमूने लेकर सीबीएनएएटी (CBNAAT) जांच के लिए भेजे गए। जांच रिपोर्ट में तपेदिक (टीबी) की पुष्टि हुई। बीमारी की सही पहचान होने के बाद तत्काल उपचार शुरू किया गया, जिससे मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और बाद में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बीमारी का वास्तविक कारण सामने आने के बाद मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि टीबी आज भी देश के सामने एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। कई मामलों में यह बीमारी रहस्यमयी बुखार और सामान्य लक्षणों के रूप में सामने आती है, जिससे शुरुआती जांचों में इसकी पहचान नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में ब्रांकोस्कोपी और सीबीएनएएटी जैसी आधुनिक जांच तकनीकें बेहद प्रभावी साबित होती हैं।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, वजन घटना, लगातार खांसी या रात में पसीना आने जैसी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श और आवश्यक जांच कराने से बीमारी का शीघ्र निदान और सफल उपचार संभव है।
सिम्स अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम जटिल रोगों के निदान एवं उपचार में लगातार उत्कृष्ट कार्य कर रही है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
सीजी क्राइम रिपोर्टर ✍️ प्रधान संपादक
