
15 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना तथा एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना है।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लगभग 75 मिलियन टन कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण क्षमता विकसित की जाएगी। नई परियोजनाओं को प्लांट एवं मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजनाओं का चयन पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

केंद्र सरकार की इस पहल का असर देश की प्रमुख कोयला कंपनियों में भी दिखाई देने लगा है। South Eastern Coalfields Limited द्वारा भी कोयला गैसीकरण की संभावनाओं पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। SECL के भटगांव क्षेत्र स्थित महामाया खदान में कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं का परीक्षण एवं तकनीकी अध्ययन जारी है। यह परियोजना भविष्य में कोयले के स्वच्छ एवं वैकल्पिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कोयला गैसीकरण तकनीक के माध्यम से कोयले को ‘सिंथेसिस गैस’ यानी ‘सिंगैस’ में बदला जाता है, जिसका उपयोग उर्वरक, रसायन, ईंधन तथा विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इससे न केवल आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में वैल्यू एडिशन, औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकार के अनुसार इस योजना से देश में 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ स्थानीय उद्योगों और बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन कोयला और 47 बिलियन टन लिग्नाइट भंडार उपलब्ध हैं। ऐसे में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की दिशा में एक रणनीतिक और दूरदर्शी पहल माना जा रहा है।
