12 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में इंदौर में आयोजित 25वें मालवा महोत्सव में बिलासपुर की प्रसिद्ध संस्था गेड़ी लोक नृत्य दल ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति से सजे इस प्रस्तुति को देखने हजारों दर्शक दशहरा मैदान में उमड़े और कलाकारों की कला पर तालियों की गड़गड़ाहट देर तक गूंजती रही।
गेड़ी लोक नृत्य दल को महोत्सव में विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ था। दल ने 6, 7 एवं 8 मई को विराट मंच पर लगातार प्रस्तुतियां दीं। संस्था के संचालक एवं लोक कलाकार अनिल कुमार गढ़ेवाल के नेतृत्व में कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के साथ अद्भुत गेड़ी नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत गीत “काट ले हरिहर बाँसे जो भला” पर पूरा पंडाल झूम उठा। वहीं कलाकार मोहन डोंगरे ने बिना ताल टूटे एक ही स्थान पर घूम-घूमकर मांदल वादन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य मांदल वादक संजय रात्रे के पारंपरिक वादन और महेश नवरंग की बांसुरी की मधुर स्वर लहरियों ने प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए।
सह कलाकार सौखी लाल सूर्यवंशी ने हारमोनियम पर गीत एवं नृत्य को सुर दिया, जबकि रामनाथ उत्तम ने सह वादक के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण तब आया जब मुख्य गेड़ी नर्तक चेतन कुर्रे एवं लक्ष्मी नारायण माण्डले के गेड़ी पर खड़े रहने के दौरान कलाकार शुभम भार्गव उनके कंधों पर चढ़कर हवा में गेड़ी लहराने लगे। इस अद्भुत दृश्य को देखकर पूरा दशहरा मैदान तालियों की गूंज से भर उठा। वहीं कलाकार फूलचंद ओगरे ने एक ही गेड़ी उठाकर नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए।
सह गेड़ी नर्तक के रूप में मनोज माण्डले, खेलन दास ओगरे, अजय चेलकर, योगेश ओगरे एवं संजय ओगरे ने भी प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
प्रदर्शन के उपरांत मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष Narendra Singh Tomar एवं केंद्रीय मंत्री Kailash Vijayvargiya ने मंच पर संस्था प्रमुख अनिल कुमार गढ़ेवाल का सम्मान किया।
कौड़ियों, चीनी मिट्टी की मालाओं, पटसन वस्त्रों और मयूर पंखों से सुसज्जित कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत छवि प्रस्तुत कर इंदौरवासियों के दिलों में विशेष स्थान बना लिया। गेड़ी लोक नृत्य के नृत्य संचालन एवं गीत संयोजन का कार्य भी अनिल कुमार गढ़ेवाल द्वारा किया गया।
