03 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/सिम्स
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने एक बार फिर अपनी उन्नत चिकित्सा क्षमता का परिचय देते हुए एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने 32 वर्षीय युवक के बिगड़े हिप इम्प्लांट को सुधारते हुए उसे फिर से सामान्य जीवन जीने लायक बना दिया।
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी अमन कश्यप का करीब एक साल पहले सिम्स में दोनों कूल्हों का प्रत्यारोपण किया गया था। ऑपरेशन के बाद उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और वह सामान्य दिनचर्या में लौट रहा था। लेकिन अचानक घर पर गिरने की घटना ने उसकी स्थिति को फिर गंभीर बना दिया। गिरने से कूल्हे में लगे इम्प्लांट अपनी जगह से खिसक गए, जिससे उसे तेज दर्द और चलने-फिरने में परेशानी होने लगी।

स्थिति बिगड़ने पर मरीज ने दोबारा सिम्स के अस्थि रोग विभाग में संपर्क किया। जांच में सामने आया कि इम्प्लांट की स्थिति काफी खराब हो चुकी है और तत्काल सर्जरी की जरूरत है। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने रिविजन टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी करने का निर्णय लिया, जो सामान्य सर्जरी की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल मानी जाती है।

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मरीज के कूल्हे का एक हिस्सा पूरी तरह अस्थिर हो चुका था। टीम ने सूझबूझ और सटीक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए केवल प्रभावित हिस्से को बदला और बाकी संरचना को सुरक्षित रखा। लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के बाद सर्जरी सफल रही।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। डॉक्टरों की निगरानी और फिजियोथेरेपी के जरिए वह अब दोबारा सामान्य रूप से चलने लगा है। खास बात यह रही कि यह महंगी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क की गई, जिससे मरीज को बड़ी आर्थिक राहत मिली।
इस ऑपरेशन में अस्थि रोग विभाग की टीम और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने समन्वय के साथ काम किया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सिम्स में अब जटिल से जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा।
डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज और सही देखभाल से गंभीर स्थिति में भी मरीजों को नई जिंदगी दी जा सकती है—यह मामला इसका सशक्त उदाहरण है।
