29 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/रायगढ़
बिलासपुर, 29 अप्रैल 2026। हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि दर बढ़ाने और विवेचना को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिरीक्षक श्री रामगोपाल गर्ग ने रेंज के अधिकारियों को ‘स्मार्ट विवेचना’ के तहत विशेष प्रशिक्षण देते हुए नई कार्यप्रणाली और दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मंगलवार को आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उसे न्यायालय से सजा दिलाना भी उतना ही जरूरी है।

वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर:नई रणनीति के तहत हत्या के हर मामले में अब ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से जब्ती की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के अनुसार यह प्रक्रिया साक्ष्यों की विश्वसनीयता को और मजबूत बनाएगी। साथ ही, घटनास्थल को ‘गोल्डन ऑवर’ में सील कर फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही साक्ष्य संकलन किया जाएगा।

124 बिंदुओं की चेकलिस्ट लागू:विवेचना में किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए 124 बिंदुओं का विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। एफआईआर दर्ज होने से लेकर चार्जशीट पेश करने तक हर चरण का दस्तावेजीकरण अनिवार्य होगा, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का लाभ न मिल सके।
डिजिटल फुटप्रिंट और सीसीटीवी की अहम भूमिका
पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट जैसे गूगल टेकआउट, इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की गहन जांच करेगी। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास 100 किलोमीटर तक लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग कर फुटेज को डीवीआर से जब्त कर भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस डायरी में शामिल किया जाएगा।
डीएनए और जैविक साक्ष्य बनेंगे मजबूत आधार:मृतक के नाखूनों में फंसे स्किन पार्टिकल्स, टूटे बाल और कपड़ों पर मिले डीएनए सैंपल को प्राथमिकता से जांचा जाएगा, जिससे आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी वैज्ञानिक रूप से सिद्ध की जा सके।
साक्ष्यों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान:‘चेन ऑफ कस्टडी’ को सख्ती से लागू करते हुए साक्ष्यों के संग्रह से लेकर एफएसएल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।
नियमित प्रशिक्षण से होगा अपडेट:आईजी श्री गर्ग ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद दर्ज होने वाले सभी हत्या के मामलों में इन नए प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। साथ ही पुलिस अधिकारियों को लगातार अपडेट रखने के लिए हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। पुलिस विभाग का मानना है कि इस नई कार्यप्रणाली से विवेचना में पारदर्शिता आएगी और अपराधियों को सख्त सजा दिलाने में सफलता मिलेगी।
