January 15, 2026
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14 जनवरी 2026

सीजी क्राइम रिपोर्टर….


दुर्ग/भिलाई।
छत्तीसगढ़ में अवैध तंबाखू कारोबार के खिलाफ जीएसटी विभाग की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रतिबंधित “सितार” गुटखा के निर्माण और बिक्री के मामले में दुर्ग के कारोबारी गुरमुख जुमनानी पर जीएसटी विभाग ने 317 करोड़ रुपये का टैक्स व पेनल्टी अधिरोपित की है। विभागीय जांच में सामने आया है कि बीते पांच वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से गुटखा का अवैध उत्पादन और वितरण किया जा रहा था।
जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, “सितार” नाम से बेचा जा रहा यह गुटखा पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद पूरे राज्य में खुलेआम खपाया जा रहा था। जांच में पांच साल के कारोबार का आकलन कर टैक्स चोरी और जुर्माने की राशि तय की गई है।


योजनाबद्ध नेटवर्क से चलता था अवैध कारोबार
जांच में यह भी सामने आया कि गुटखा निर्माण के लिए गोदाम किराए पर लिए जाते थे, जिनके समझौते गुरमुख के पिता द्वारा किए जाते थे। इन्हीं स्थानों पर गुटखा की पैकिंग होती थी और फिर बोरे भरकर दुकानों तक सप्लाई की जाती थी। कार्रवाई के दौरान जांच टीम को कई पुराने किरायानामे और समझौते जब्त हुए हैं।


बताया गया कि “सितार” गुटखा बाजार में 2 रुपये प्रति पैकेट की दर से बेचा जाता था। गुटखा का फॉर्मूला तैयार करने वाले दीपक पांडे के अनुसार, मशीन से एक मिनट में करीब 250 पैकेट तैयार होते थे। रोजाना लगभग 50 बोरा गुटखा बाजार में खपाया जाता था। उत्पादन सीमित दिनों में, लेकिन बड़े पैमाने पर किया जाता था।
बेटे की फैक्ट्री से तैयार होता था कच्चा माल
जीएसटी विभाग ने जुलाई 2025 में जोरातराई और गनियारी स्थित फैक्ट्रियों पर छापा मारा था, जहां सिर्फ पैकिंग का काम होता पाया गया। बाद में खुलासा हुआ कि गुटखा का कच्चा माल गुरमुख के बेटे सागर की राजनांदगांव स्थित “कोमल फूड” फैक्ट्री में तैयार किया जाता था। सरकारी रिकॉर्ड में यह फैक्ट्री मीठी सुपारी निर्माण के लिए पंजीकृत थी।


जांच में यह भी सामने आया कि गनियारी और जोरातराई में काम करने वाले मजदूर वही थे, जो कोमल फूड फैक्ट्री में भी कार्यरत मिले। मजदूरों की आपूर्ति छिंदवाड़ा के लेबर कॉन्ट्रेक्टर बबलू द्वारा की जाती थी। गुटखा निर्माण का कार्य रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक चलता था।
सील फैक्ट्री से मशीन निकालने का आरोप
जीएसटी कार्रवाई के बाद खाद्य विभाग ने गुटखा फैक्ट्री को सील कर दिया था, लेकिन आरोप है कि बाद में टीन शेड तोड़कर मशीनें और अन्य सामग्री बाहर निकाल ली गई। इसी बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि गुरमुख अपने दो साझेदारों के साथ दुर्ग में शराब बॉटलिंग प्लांट शुरू करने की तैयारी में था, जिस पर अब विभागों की विशेष नजर है।
पुलिस व विभागीय मिलीभगत की भी जांच
वर्ष 2023 में मोहन नगर पुलिस ने गुरमुख जुमनानी और उसके रिश्तेदार जगदीश को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। फिलहाल गुरमुख पिछले करीब 100 दिनों से जेल में बंद है। सेशन कोर्ट से जमानत खारिज हो चुकी है, जबकि हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई अब फरवरी तक टल गई है।


अधिकारियों के मुताबिक, छापे के बाद गुरमुख फरार हो गया था और उसे खाद्य विभाग व पुलिस से कार्रवाई से जुड़ी सूचनाएं मिलती रहीं। इस कारण उसे पकड़ने में करीब दो महीने का समय लगा। मामले में विभागीय मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।