06 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। मार्च 2024 में कोनी थाना क्षेत्र में 5 वर्षीय मासूम बालिका से सामूहिक दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में आखिरकार पीड़िता को न्याय मिल गया। बिलासपुर पुलिस की सशक्त और वैज्ञानिक विवेचना के आधार पर माननीय किशोर न्याय बोर्ड, बिलासपुर ने दो विधि से संघर्षरत किशोरों को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के लिए सम्प्रेषण गृह भेजने का आदेश सुनाया है।
घटना सामने आते ही कोनी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपराध दर्ज कर वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत तरीके से विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए, चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों विधि से संघर्षरत किशोरों को अभिरक्षा में लेकर उनका भी चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
विवेचना पूर्ण होने के बाद भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376(डी)(बी) तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 4, 5(आई), 5(एम) एवं 6 के तहत अभियोग पत्र किशोर न्याय बोर्ड, बिलासपुर में प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों को विश्वसनीय मानते हुए दोनों किशोरों को दोषी करार दिया। अपने फैसले में किशोर न्याय बोर्ड ने स्पष्ट कहा कि विवेचना अधिकारी द्वारा की गई जांच पूरी तरह विधिसम्मत, निष्पक्ष एवं त्रुटिरहित रही तथा विवेचना में किसी भी प्रकार की कमी नहीं पाई गई। इसके आधार पर दोनों दोषियों को तीन वर्ष के लिए सम्प्रेषण गृह भेजने का आदेश पारित किया गया।
इस संवेदनशील मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी कोनी निरीक्षक गोपाल सतपथी ने की थी। उत्कृष्ट एवं प्रभावी विवेचना के माध्यम से दोषसिद्धि सुनिश्चित होने पर उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर ने निरीक्षक गोपाल सतपथी की सराहना करते हुए उन्हें उचित पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की है।
— सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
