बिलासपुर। न्यायधानी में जमीन के नाम पर कथित जालसाजी के मामले में प्रफुल्ल झा एक बार फिर पुलिस की जांच के दायरे में आ गया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने विशालचंद्र केसरी की शिकायत पर उसके खिलाफ 10 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़े मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज किया है। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने दूसरे लोगों की जमीन को अपना बताकर बेचने का सौदा किया और अग्रिम राशि के रूप में 10 लाख रुपये ले लिए।

70 लाख रुपये प्रति एकड़ का सौदा, जांच में सामने आई जमीन की हकीकत। शिकायतकर्ता विशालचंद्र केसरी के अनुसार, 10 दिसंबर 2025 को मौजा अमेरी, तहसील सकरी की जमीन के कई खसरों का सौदा 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से किया गया था। इसके लिए उन्होंने चेक और आरटीजीएस के जरिए 10 लाख रुपये अग्रिम दिए। बाद में जांच कराने पर खसरा नंबर 232 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में चंद्रकली बाई के नाम दर्ज मिली, जो गोंड़ जनजाति से थीं और जिनकी मृत्यु हो चुकी है। शिकायत में जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, मसानगंज और तोरबा की जमीनों के सौदे में नागपुर में पंजीकृत बताए गए मुख्तियारनामे का इस्तेमाल किया गया, जिसे पुलिस जांच में कथित तौर पर कूटरचित पाया गया।

चार महीने पहले भी दर्ज हुआ था मामला। प्रफुल्ल झा के खिलाफ 10 मई 2026 को भी सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी के आरोप में अपराध क्रमांक 631 दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता को जब इस पुराने मामले की जानकारी मिली और रजिस्ट्री में लगातार देरी होने के बाद संदेह गहराया, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नया अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई है। पुलिस अब दस्तावेजों, जमीन के सौदों और संभावित अन्य शिकायतों की पड़ताल कर रही है। मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
