बिलासपुर में ट्रैफिक व्यवस्था और भारी-भरकम चालानी कार्रवाई को लेकर नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। ट्रैफिक थाने में दो महिलाओं के रोने-बिलखने का वीडियो सामने आया है, जहां वे चालान की रकम को लेकर परेशान नजर आईं। महिलाओं का कहना है कि 10 से 12 हजार रुपये तक के चालान की राशि वे कहां से लाएं। उनके साथ मौजूद मासूम बच्चा भी पूरे घटनाक्रम को अवाक होकर देखता रहा। इस तस्वीर ने चालानी कार्रवाई के मानवीय पहलू और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 173 करोड़ रुपये की आईटीएमएस व्यवस्था लागू की गई थी। दावा था कि इससे यातायात सुगम होगा और जाम की समस्या कम होगी, लेकिन शहर के कई प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर आज भी आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। दयालबंद-लिंगियाडीह पुल, कांग्रेस भवन-कुड़ूदंड चौक, छत्तीसगढ़ भवन तिराहा और आबकारी वेयर हाउस चौक समेत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग से आवागमन प्रभावित होने की बात नागरिक उठा रहे हैं। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की तकनीक के बावजूद जब आम जनता जाम और अव्यवस्था से जूझ रही है, तो व्यवस्था की प्राथमिकता आखिर क्या है?

दूसरी ओर राजकिशोर नगर, तोरवा छठ घाट रोड, शनिचरी रपटा, रिवरव्यू-सिम्स तिराहा समेत कई इलाकों में मैनुअल चालानी कार्रवाई भी जारी है। नागरिकों का आरोप है कि शहर और आसपास के क्षेत्र की आबादी तथा वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन सड़क और यातायात प्रबंधन उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। ऐसे में “ट्रैफिक सुधार पहले या चालान का लक्ष्य?” यह सवाल अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
