03 अगस्त 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। हत्या के एक चर्चित अंधे कत्ल की गुत्थी महज 24 घंटे में सुलझाने वाले मामले में अब न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। इस प्रकरण में वैज्ञानिक विवेचना, ई-साक्ष्य, फोटो-वीडियोग्राफी और नवीन कानून के प्रावधानों का प्रभावी पालन पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुआ। विशेष बात यह रही कि मामले के सभी प्रत्यक्ष गवाह न्यायालय में मुकर (होस्टाइल) गए, इसके बावजूद आरोपी को मेमोरेंडम और जब्ती सहित अन्य ठोस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
प्रकरण चौकी बेलगहना, थाना कोटा क्षेत्र के अपराध क्रमांक 769/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) से संबंधित है। मामले की विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह द्वारा की गई थी।
पुलिस के अनुसार, 4 अगस्त 2025 को पहाड़बछाली निवासी कोटवार गंगा बाई गंधर्व ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच छेदीलाल यादव की बृहस्पति बाई के घर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला कर निर्मम हत्या कर दी है। सूचना मिलते ही तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया तथा वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित किए गए।
विवेचना के दौरान संदेही यशराज भानु उर्फ छोटा (20 वर्ष), निवासी पहाड़बछाली को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त टांगिया बरामद कर विधिवत जब्त किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को 5 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान सभी गवाहों के होस्टाइल हो जाने के बावजूद पुलिस द्वारा की गई वैज्ञानिक एवं सटीक विवेचना, ई-साक्ष्य, फोटो-वीडियोग्राफी, मेमोरेंडम और जब्ती की मजबूत कड़ी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
यह निर्णय दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जांच और कानून के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन अपराधियों को सज़ा दिलाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुलिस की पेशेवर विवेचना के चलते पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सका।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
